Khandal Vipra Samaj , Jodhpur

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गोत्र प्रवर्तक ऋषि कुल का परिचय

सम्पूर्ण ब्राह्राण समाज ऋषि-कुल का वंषज रहा है। ऋषियों के नाम पर समग्र ब्राह्राण समाज के गोत्र प्रचलित हुए हैं। अत: ब्राह्राण समाज में भेद उत्पन्न करना या छोटे-बड़े के रूप में आकलन करना समाज में भेद उत्पन्न करने का परिचायक है। आज का गौड ब्राह्राण समाज गौड प्रदेष में निवास करने के कारण गौड कहलाया। यथार्थ यह कि वे भी इसी ऋषि-कुल के वंषज है। अत: आज के खाण्डल एवं गौड आदि विप्र समाज में भिन्नता स्वीकार करना इतिहस की भयंकर भूल मानी जाएगी।

प्राचीन काल में कुल 42 गोत्र प्रवर्तक ऋषि रहे हैं। मनु भगवान ने मुख्य 7 गोत्र प्रवर्तक एवं 24 अन्य मानें है। मंगल महर्षि चरितम चरितम में 50 शासन और उनके गोत्र प्रवर्तक लिखे है। भारत धर्म महामण्डल के महोपदेषक श्रीयुत्त पं. वäावर लालजी की बनार्इ गर्इ वंषावली में भी इस प्रकार उद्धत हैं। अत: इन गोत्र-प्रवर्तक ऋषियों की जानकारी व उनका स्मरण आज के परिप्रेक्ष्य में आवष्यक है। खाण्डल विप्र समाज की युवा पीढ़ी को अपने पूर्वजों की सही जानकारी उपलब्ध हो, एतदर्थ वंषावली का प्रकाषन किया जा रहा है।

खाण्डल विप्रों के ऋषि गोत्र

सासन या अवटंक (गोत्र) वस्तुत: गोत्र प्रवर से भिन्न होते है। गोत्र प्रवर्तक ऋषियों को माना गया है। सभी ऋषि गोत्र प्रवर्तक नहीं होते है। कारण विषेष से प्रचलन से आये उपरोक्त सासनों के ऋषियों का उल्लेख भी आवष्यक हो जाता है। गोत्र प्रवर्तक ऋषियों की संख्या 42 है। किन्तु इन 42 ऋषियों की नामावली एक साथ कहीं संग्रहीत नही मिलती। गोत्र का आधार वैदिक शाखायें है। पहले वेद की अनेक शाखायें थीं। उन शाखाओं के अनुयायी, शाखा प्रवर्तक को अपना गोत्र प्रवर्तक मानते थे। इसी आधार पर गोत्र प्रधान माना जाता था दुर्भाग्यवष आज वैदिक शाखायें तो नहीं रही, किन्तु उनके प्रतीक गोत्र आज भी प्रचलित है। खाण्डल विप्रों के सभी पचास गोत्रों के ऋषि और प्रवर निम्न प्रकार है :-

सासन ऋषि गोत्र प्रवर
नवहाल
डीडवाणिया
गोरसिया
अडिग्रस गोत्र
अडिग्रस गोत्र
अडिग्रस गोत्र
त्रिप्रवर अडिग्रसवास्यगौत्तमा:
त्रिप्रवर अडिग्रसवास्यगौत्तमा:
त्रिप्रवर अडिग्रसवास्यगौत्तमा:
वील
निटाणिया
जैमिनी गोत्र
जैमिनी गोत्र
त्रिप्रवर जैमन्युतथ्वसांकृतय:
त्रिप्रवर जैमन्युतथ्वसांकृतय:
पीपलवा
गोधला
मुछावला
पराषर गोत्र
पराषर गोत्र
पराषर गोत्र
त्रिप्रवर पराषरषäविसिष्ठा::
त्रिप्रवर पराषरषäविसिष्ठा:
त्रिप्रवर पराषरषäविसिष्ठा:
सिंहोटा
गुजवाड़ा
तिवारी
कृष्णात्रेय गोत्र
कृष्णात्रेय गोत्र
कृष्णात्रेय गोत्र
त्रिप्रवर कृष्णात्रेयात्रेयवात्या:
त्रिप्रवर कृष्णात्रेयात्रेयवात्या:
त्रिप्रवर कृष्णात्रेयात्रेयवात्या:
खड़भड़ा (निठुरा)
डावस्या
घृतकौषिक गोत्र
कृष्णात्रेय गोत्र
त्रिप्रवर कुषकौषिकबन्धुला
त्रिप्रवर कुषकौषिकबन्धुला
भुरटिया भरद्वाज गोत्र त्रिप्रवर भरद्वाजकौषिकजमदग्न्य:
भाटीवाड़ा भरद्वाज गोत्र त्रिप्रवर भरद्वाजकौषिकजमदग्न्य:
वीलवाल
सोड़वा, षिवोवाह
दुगोलिया
कौषिक गोत्र
कौषिक गोत्र
कौषिक गोत्र
त्रिप्रवर कौषिकात्रिजमदग्न्य:
त्रिप्रवर कौषिकात्रिजमदग्न्य:
त्रिप्रवर कौषिकात्रिजमदग्न्य:
मंगलहारा
टकडहारी
गौतम गोत्र
गौतम गोत्र
त्रिप्रवर गौतमवासिष्ठबार्हस्पत्य:
त्रिप्रवर गौतमवासिष्ठबार्हस्पत्य: